नमस्कार दोस्तो! उम्मीद है आपका पौधायन खूब हरा-भरा होगा।

दोस्तो आज हम एक बहुत ही प्यारे पौधे से मिलने वाले हैं जिसकी चौड़ी रंगीन पत्तियों का आकार तीर के आगे वाले हिस्से जैसा होता है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं एरोहेड वाइन की। जिसे वैज्ञानिक भाषा में सिंगोनियम पोडोफाइलम कहा जाता है। इन्हें एरोहेड फाइलोडेन्ड्रॉन, अफ्रीकन एवरग्रीन, गूज़फुट जैसे नामों से भी जानते हैं।

इन पौधों की कई किस्में प्रकृति में मौजूद हैं। पत्तियों के अलग-अलग रंगों और आकार के हिसाब से इन्हें अलग-अलग प्रजातियों में बांटा गया है। और इनमें से ज्यादातर आपको आसानी से किसी भी नर्सरी में मिल जाएंगी। कुछ प्रजातियों में पत्तियाँ हल्की गुलाबी रंगत लिए हुए लगभग 4 से 6 इंच तक लम्बी होती हैं। कुछ एक किस्मों में गहरे हरे रंग की पत्तियों में सफ़ेद रंग की नसें बढ़िया कंट्रास्ट बनाती हैं। इसके अलावा और भी कई तरह के सिंगोनियम हरे, क्रीम, सफ़ेद, गुलाबी और पीच रंग के अलग-अलग शेड्स लिए हुए नज़र आते हैं। कुछ किस्मों में पत्तियाँ बड़ी होती हैं तो कुछ में बहुत छोटी लगभग 1 से 2 इंच की लम्बाई वाली पत्तियाँ भी होती हैं। छोटी पत्ती वाले पौधों को घर के अन्दर किसी मेज पर सजाकर उसे आकर्षक और जिन्दा बनाया जा सकता है।

Syngonium Wendlandi

यह पौधा न सिर्फ देखने में सुन्दर है बल्कि इसके और भी बहुत से फ़ायदे हैं। यह हवा से कई तरह के नुकसानदायक रसायनों (जैसे बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड, टॉलुइन, ज़ाइलीन वगैरह) को साफ़ करता है, अपने आसपास के वातावरण में नमी बनाए रखता है और कार्बन डाई ऑक्साइड को भी सोखता है। इसलिए प्राकृतिक रूप से साफ़ ताज़ी हवा के लिए इन्हें प्रदूषण की मार झेलते बड़े शहरों में, अपार्टमेंट्स में, एअरकंडीशंड इमारतों में, घरों और ऑफिसों में ज़रूर लगाइए।

सिर्फ़ इतना ही नहीं चाइनीज़ वास्तुशात्र फेंग शुई के हिसाब से इन पौधों को लगाने से घर में सकारात्मक उर्जा ‘ची’ का प्रवाह बढ़ता है। इसकी पत्तियों की पांच भुजाएँ पांच प्राकृतिक तत्त्वों (जल, अग्नि, धरती, लकड़ी और धातु) का प्रतीक समझी जाती हैं। यह पौधा घर में यिन और यांग का संतुलन साधने में मदद करता है। यिन मतलब नकारात्मकता और अन्धकार और यांग मतलब सकारात्मकता और प्रकाश। घर में सुख, शान्ति और समृद्धि के लिए इन दोनों का संतुलन ज़रूरी है। यिन मतलब स्त्री और यांग मतलब पुरुष और इन दोनों के योग से बनता है जीवन। इन दोनों शक्तियों के जुड़ाव में जीवन का अर्थ खोजना ही फेंग शुई है। वैसे ही जैसे हम शिव और शक्ति के मिलन को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजते हैं।

आइए अब देखें कि इन खूबसूरत पौधों का ध्यान कैसे रखना है।

ये पौधे अपने मूल रूप में मध्य और दक्षिणी अमेरिका रहवासी हैं। मध्य अमेरिका के लगभग सभी द्वीपों में ये पाए जाते हैं। इनका फैलाव मैक्सिको से लेकर ब्राजील और बोलीविया तक है। यह पूरा इलाका बहुत ही घने जगलों से ढका हुआ है। दुनिया के सबसे घने अमेज़न के जंगल जिन्हें धरती का फेफड़ा भी कहा जाता है इसी जगह पर हैं और यही जंगल इन पौधों के असली घर हैं। वहाँ ये पौधे कठोर लताओं के रूप में विकसित हुए हैं। इन जंगलों में बहुत लम्बे-लम्बे पेड़ होते हैं जिनके सहारे ये लताएँ चढ़ जाती हैं और प्रकाश की तलाश में बढ़ते-बढ़ते 20 मीटर तक लम्बी हो जाती हैं। इनमें जगह-जगह से जड़ें (वायवीय जड़ें-aerial roots) निकलती हैं जिनके सहारे ये पेड़ों से चिपक जाती हैं।

Syngonium Albovirens

बहुत देखभाल की ज़रूरत इन्हें नहीं पड़ती। पर ये विषुवत रेखा के आस पास की जगहों पर पले-बढ़े पौधे हैं जहाँ खूब बारिश होती है इसलिए इन्हें पानी नियमित रूप से देना है। जब भी इनके नीचे की मिट्टी थोड़ी सूखी हो जाए आप इन्हें ठीक से पानी दीजिए। पर हमेशा ज्यादा पानी देने से बचिए। पौधे के आसपास की ज़मीन या गमले में जलभराव होने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिससे उनके आस पास फफूंद लग सकती है, कीड़े-मकोड़े लग सकते हैं और पौधा सड़ भी सकता है। इसलिए एक बार में ज्यादा पानी देने से अच्छा है कि कम अन्तराल में थोड़ा-थोड़ा पानी दें। सर्दी के दिनों में 3 से 4 दिनों में और गर्मी में हर दूसरे दिन पानी देना काफ़ी रहेगा।

मिट्टी ऐसी हो कि जिसमें पानी ठहरता न हो। गमले में नीचे छेद ज़रूर हो जिससे ज़रूरत से ज्यादा पानी जमा न हो सके। मिट्टी या सीमेंट के गमले में लगाया हो तो पानी और भी जल्दी देना पड़ सकता है। क्योंकि इन गमलों की सतह से भी पानी का वाष्पन होता रहता है इसलिए इनकी मिट्टी जल्दी सूखती है। अगर किसी कारण से आप नियमित रूप से पानी नहीं दे सकते तो बेहतर होगा कि इन्हें लकड़ी, प्लास्टिक या किसी ऐसे गमले में लगाएं जिसकी सतह से पानी का वाष्पीकरण न होता हो। धातु से बने गमले में आपको कोई भी पौधा कभी भी सीधे नहीं लगाना है। अगर ऐसे गमलों का प्रयोग घर की सजावट के लिए कर रहे हों तो हमेशा पौधे को किसी दूसरे गमले में लगाकर गमले समेत उसके अन्दर रख दीजिए।

खाद की ख़ास ज़रूरत इन्हें नहीं होती पर ढेर सारी पत्तियों वाला भरापूरा स्वस्थ पौधा चाहते हों तो थोड़ी खाद महीने में दो बार दे सकते हैं। इसके लिए खाद की जितनी मात्रा एक बार में देने के लिए पैकेट में लिखी हो उसकी आधी मात्रा ही पौधे को देनी है।

एक और बात… जहाँ ये रहते हैं वहाँ बहुत घने जंगलों और ऊँचे पेड़ों की वजह से धूप नीचे तक नहीं पहुँचती। इन जंगलों में उजाले के लिए तरह-तरह के पेड़-पौधों और लताओं में आपस में होड़ लगी लगी रहती है। इसलिए इन्हें पत्तियों के बीच से छन कर आती थोड़ी-बहुत धूप और खूब उजाले में रहने की आदत है। तेज़ धूप में रखने पर इनकी पत्तियाँ जल जाती हैं और उनका रंग खराब हो जाता है। कम रोशनी वाली जगहों में पत्तियाँ पीली पड़कर गिरने लगती हैं। बालकनी या आँगन जैसी जगहें जहाँ खूब उजाला रहता हो और धूप कम देर के लिए आती हो इनके लिए एकदम मुफीद हैं। आपका पौधायन अगर खुले में है तो किसी पेड़ के नीचे या दीवार के किनारे या छाया वाली खाली जगह को भरने के लिए इनका बेहतरीन इस्तेमाल कर सकते हैं।

इन पौधों को तरह-तरह से लगाया जा सकता है। बढ़ती हुई लताओं को समय-समय पर काटते-छांटते रहने से ये खूब घने हो जाते हैं। इनकी जड़ें कई जगह से मिट्टी में लग जाएंगी और कुछ ही दिनों में पूरा गमला बड़ी-बड़ी पत्तियों से भर उठेगा। या फिर आप इन्हें किसी टोकरीनुमा गमले में लगाकर उसे लटका भी सकते हैं। सजीली पत्तियों से भरापूरा गमला और उसमें कहीं-कहीं से लटकती हुई नई पतली लताएं घर के किसी भी कोने में नई जान ला देंगी। इन्हें लगाने का सबसे सरल और प्राकृतिक तरीका है कि किसी दीवार, पेड़ या खम्भे का सहारा देकर धीरे-धीरे इन्हें चढ़ा दिया जाए। इसके लिए शुरुआत में आपको किसी रस्सी या डोरी से इनको दीवार या खम्भे से टिकाकर बांधना होगा। फिर धीरे-धीरे समय के साथ इनकी बाहरी जड़ें ख़ुद ही उस सहारे को पकड़ लेंगी और ऊपर की ओर बढ़ना शुरू कर देंगी क्योंकि सदियों से ये यही तो करते आए हैं।

इनकी संख्या बढ़ाना बहुत ही आसान है। कम से कम 4 से 6 इंच लम्बी कोई भी डाल काट कर मिट्टी में खोंस देनी है। कुछ ही दिनों में वहां से नई जड़ें निकल कर नया पौधा बन जाएगा। काटी हुई इस डाल को आप मिट्टी की जगह पानी में भी डाल सकते हैं। इसके लिए डाल का निचला हिस्सा लगभग 2 या 3 इंच तक पानी में डुबाकर रखिये। हफ्ते भर के अन्दर ही इसमें नई जड़ें फूट जाएंगी। इस तरह से पौधा बनाने का एक फायदा है कि पानी में जड़ें निकलती हुई दिखाई देंगी पर इसके लिए आपको मौसम, तापमान और हवा में नमी का ध्यान रखना होगा नहीं तो पौधा सूख भी सकता है और सड़ भी सकता है। सबसे आसान तरीका ये है कि जो भी डाल थोड़ी बड़ी हो जाए उसको काटे बिना ही मिट्टी या बगल में रखे किसी गमले में दबा दें। ऐसा करने से पौधा अपने मूल पौधे से जुड़ा रहकर ही दूसरी जगह से नई जड़ें निकाल देगा। फिर आप इसको अलग करके नया पौधा बना सकते हैं। अगर पौधा पहले ही किसी बड़े गमले या मिट्टी में लगा हो तो पत्तियाँ उठाकर उसकी जड़ों को गौर से देखने पर आपको कई जगह ये जड़ें मिट्टी में लगी हुई नज़र आएंगी। इनको एक-दूसरे से अलग करके भी आप कई पौधे बना सकते हैं।

Syngoniyum Podophyllum

इन्हें घर में लगाने पर एक ही परेशानी हो सकती है कि ये थोड़े ज़हरीले होते हैं। इन्हें निगल लेने पर मुँह दर्द, पेट दर्द, जलन, सूजन जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं। इसलिए अगर घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हों तो इन्हें उनकी पहुँच से दूर रखें। ऐसे में इनको किसी ऊँचे लटकते हुए गमले में ही लगाएं या इनके सामने कुछ दूसरे पौधे लगाकर इन्हें अन्दर की तरफ रखें।

तो दोस्तो सिंगोनियम को अपने पौधायन में ज़रूर जगह दें। ये न सिर्फ घर की सुन्दरता बढाएँगे बल्कि उसकी आबोहवा को भी साफ़ रखेंगे। इस पौधे को लेकर अगर आपका कोई सवाल है जिसका जवाब यहाँ न मिला हो तो कमेंट में ज़रूर पूछें। जल्दी ही फिर दोस्ती करेंगे एक नए पौधे से… तब तक के लिए नमस्कार!

Hi, I’m Paudhayan

4 Comments

  1. चित्रों के साथ आलेख और रोचक हो गया है,पौधो के बारे में जानकारी के साथ पौधो की पहचान भी आसान हो गई है…..अब सही अर्थ में आलेख पूर्ण हुआ।इस सुंदर जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

  2. चित्रों के साथ आलेख और रोचक हो गया है,पौधो के बारे में जानकारी के साथ पौधो की पहचान भी आसान हो गई है…..अब सही अर्थ में आलेख पूर्ण हुआ।इस सुंदर जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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