लहसुनिया बेल

नमस्कार दोस्तो! पौधायन में हाज़िर हैं हम आपके लिए एक नए पौधे के साथ। दोस्तो, सर्दी की आमद सब तरफ ढेरों रंगों की बहार ले आई है। गेंदा गुलाब गुलदाउदी कचनार सदाबहार जैसे हजारों पेड़-पौधे फूलों से लद-बद गए हैं। इस मौसम में भी आपकी बालकनी अगर फूलों से खाली है और घर की चहारदीवारी पर कोई लता लटक नहीं रही या खिड़की के बगल से कोई बेल चढ़ नहीं रही तो आपका घर अभी भी मकान ही है। तो आज हम ऐसी ही एक लता से मुलाक़ात करने वाले हैं जो आपके सर्द शुष्क मकान को प्यारे से बैंगनी घर में बदल देगी।
जान-पहचान
जी हाँ! आज हम दोस्ती करेंगे लहसुनिया बेल से। इसकी पत्तियाँ मसलने पर लहसुन जैसी गंध छोड़ती हैं। यूँ इससे कभी लहसुन की गंध नहीं आती (यह सोचकर न डरें कि इसे लगा लिया तो पूरा घर लहसुनमय हो जाएगा)। हाँ, अगर पौधा बड़ा है, लताएँ बिखरी हुई हैं और बगल से निकलने पर झूलती हुई दो-चार डालें भी हिल गईं तो लहसुनी महक का आनन्द ज़रूर मिलेगा।
इसकी पत्तियाँ चौड़ी और पौधा झाड़ीनुमा होता है जिसे काट-छाँट कर सही रास्ता दिखाकर घर की चहारदीवारी या बालकनी पर छैलाया-फैलाया जा सकता है। दीवार या छज्जे का सहारा न हो तो बाँस की टटरी या रस्सी का मजबूत जाल बनाकर उस पर भी इसे चढ़ा सकते हैं। मजबूत इसलिए क्योंकि टहनियां वजन होने की वजह से हल्की पतली रस्सी झुक जाएगी।

मौसम
साल में दो बार ये भर-भरकर खिलते हैं। एक बार पतझर के मौसम में जब सर्दी आने को होती है, ताप औसत और नमी सामान्य रहती है। दूसरी बार वसन्त में जब फिर से मौसम इनके अनुकूल होता है।
पूरा पौधा करीब महीने-डेढ़ महीने तक फूलों से भरा-पूरा रहता है। हालांकि एक फूल का जीवन सात से पंद्रह दिनों का ही होता है। फूल शुरुआत में गहरे बैंगनी रंग के होते हैं। फिर धीरे-धीरे बैंगनी के कई सारे शेड्स से गुज़रते हुए आखिर में लगभग सफ़ेद होकर झर जाते हैं।
काट-छाँट
फूल खिलने जब बंद हो जाएँ तब पौधे की छंटाई कर दें। इससे ढेर सारी नई शाखाएँ निकलती हैं और अगले मौसम में पौधा भरपूर ऊर्जा के साथ ज्यादा फूलों के लिए तैयार हो जाता है।
कितनी धूप कितनी छाया
इस लता को पूरी छाया में न लगाएं। पौधा खुली धूप पसंद करता है। छाया में लगाने पर इसमें फूल नहीं आएँगे या कम आएँगे। बहुत तेज़ धूप में ज्यादा देर तक रहने से भी पौधा सूखने लगता है। इसलिए रेगिस्तानी इलाकों में या ज्यादा तापमान वाले मौसम में इन्हें छाया में रखें। पौधा ज़मीन में लगा हो तो इनके ऊपर जाली वाले हरे परदे वगैरह तान दें जो इसी काम के लिए बाज़ार में उपलब्ध हैं।

दाना-पानी
ये पौधे खाद के बिना भी अपना काम बखूबी चला लेते हैं। लेकिन फूल खिलने के मौसम से ठीक पहले थोड़ी सी खाद देने से पौधे को ताकत मिलेगी। खाद ऐसी चुनें जिसमें फॉसफोरस की मात्रा थोड़ी ज्यादा हो। ख़ास फूलों वाले पौधों के लिए कई तरह की ऑर्गैनिक खाद भी उपलब्ध हैं। उनका प्रयोग भी कर सकते हैं।
इन्हें पानी देने में कोताही कतई न बरतें। गर्मी के मौसम में हर रोज़ और सर्दी में दो-तीन दिन के अंतराल पर ठीक से पानी दें।
मिट्टी
मिट्टी ऐसी हो जिसमें पानी रुकता न हो। इस लिहाज से दोमट मिट्टी इनके लिए सबसे अच्छी है। दोमट न मिले तो चिकनी मिट्टी और रेत को मिलाकर बढ़िया मिट्टी तैयार कर सकते हैं।
गमला
लगाने को इसे गमले में भी लगा सकते हैं। पर असली मज़ा लहसुनिया बेल को ज़मीन में लगाने में है। पौधा जैसे-जैसे बड़ा होगा इसका मूल तना लकड़ी जैसा कठोर और मोटा होता जाएगा। इसलिए इसे बहुत छोटे गमले में न लगाएं।
नए पौधे
लहसुनिया बेल के नए पौधे तैयार करना बेहद आसान है। इसके लिए एक ज़रा मोटी डाल को काटकर नम भुरभुरी मिट्टी में करीब डेढ़ से दो इंच तक खोंस दीजिए। चाहें तो इस डाल को पानी में डालकर भी रख सकते हैं। पंद्रह से बीस दिनों में पौधे में जड़ें आ जाएंगी और फिर अगले दो-चार दिनों में नई कोंपलें नज़र आने लगेंगी। इस तरह लीजिए ज़रा सी मेहनत में आपका नया पौधा तैयार है।
बड़े काम की बेल
अच्छी बात यह है कि इस पौधे की पत्तियाँ और फूल विषैले नहीं हैं। इन्हें खाया जा सकता है। यानी घर में लहसुन ख़तम हो गया हो तो इनके पत्तों को चटनी-अचार-छौंक-बघार में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जिन देशों में ये प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं वहां तो इनकी पत्तियों को चाय में डालकर और काढ़ा बनाकर भी पीते हैं। कहते हैं ये सर्दी-खांसी में फायदा करती हैं। तरह-तरह की दवाओं में भी इन पत्तियों और फूलों का प्रयोग किया जाता है। माना जाता है कि इनकी पत्तियाँ दर्द-निवारक और ज्वरनाशक का काम करती हैं। सूजन कम करने और गठिया जैसे वात-रोगों की औषधि में भी इनका प्रयोग किया जाता है।
तो दोस्तो, लहसुनिया बेल साल में दो-तीन महीने आपके घर को बैंगनी रंग देगी। घर में कभी-कभार लहसुन का काम भी कर दिया करेगी और आपकी चाय और काढ़े में मिलकर मौसमी रोगों से भी दूर रखेगी। इसकी गंध से मच्छर और कीड़े-मकोड़े भी दूर रहते हैं तो इन्हें कम करने में भी इससे मदद मिलेगी। फिर इसकी देख-रेख भी न के बराबर करनी है। तो सोच क्या रहे हैं जिस किसी दोस्त या पड़ोसी के घर आपको ये दिखे उससे एक लहसुनी डाल मांग लाइए। आज ही!!
जल्दी ही फिर मिलेंगे एक नए पौधे के साथ। तब तक अपने पौधायन को ख़ुशहाल बनाए रखिये।