रेन लिली

नमस्कार दोस्तो!
पौधायन में आपका स्वागत है। दोस्तो, आजकल चारों ओर मानसून का जलवा है। भारत के लगभग पूरे भूभाग पर मानसून के साथ बारिश की आमद हो चुकी है। पेड़-पौधे खूब हरे-भरे धुले-धुले निखरे-सुथरे हो गए हैं। आख़िरकार गर्मी थमी, ताप में कमी और हवा में नमी है। बारिश के पानी में भीगने का भी अपना ही सुख है। नन्हीं मुन्नी ठंडी-ठंडी बूँदें जब शरीर को छूती हैं तो आत्मा तक खिल उठती है। क्या आपको भी बारिश में भीगना पसंद है?
आप सोच रहे हैं न कि मैं आज सुबह-सुबह बारिश की बात क्यों ले बैठी। इसलिए कि आज हम जिस पौधे से जान-पहचान बढ़ाने वाले हैं उन्हें बारिश में नहाना खूब पसंद है। बारिश की पहली फुहार के बाद ही इन छोटे-छोटे पौधों में कलियाँ और फूल आने शुरू हो जाते हैं। फिर पूरे मौसम ये बारिश के पानी में जितना नहाते हैं उतना खिलते हैं।
नाम-जान-पहचान
इस पौधे का नाम ज़ेफिरैन्थेस लिली है। फेयरी लिली, मैजिक लिली, ज़ेफिर लिली जैसे और भी कई सारे नाम हैं इनके पर बारिश के लिए इनके बेपनाह प्यार की वजह से ज्यादातर लोग इन्हें रेन लिली के नाम से जानते हैं।
ये पौधे देखने में थोड़ी मोटी घास जैसे होते हैं। गहरे हरे रंग की पत्तियाँ ऊपर से नुकीली और घास की तरह ही सीधी रहती हैं। लम्बाई भी लगभग 8 इंच से 1 फीट तक ही होती है इनकी। इन्हें खोदें तो ज़मीन के नीचे प्याज़ जैसे छोटे-छोटे कन्द नज़र आएँगे। पौधे के आकार के हिसाब से फूल बड़े और आकर्षक होते हैं और गहरे हरे रंग की पत्तियों के साथ बढ़िया कंट्रास्ट बनाते हैं। सफ़ेद, पीले, गुलाबी, नारंगी और भी न जाने कितने रंगों के फूलों वाली इनकी दसियों किस्में उपलब्ध हैं।
कैसे लगाएं
इन पौधों को क्यारियों के किनारे-किनारे बॉर्डर जैसा बनाते हुए लगाया जा सकता है। या फिर थोड़ी जगह में रेन लिली के कई सारे पौधे एक साथ लगाकर भी पौधायन को खूबसूरत बना सकते हैं। कच्ची ज़मीन न हो तो गमले में भी इन्हें आसानी से रोपा जा सकता है।
नफ़ा-नुकसान
रेन लिली के बल्ब देखने में भले ही छोटे-छोटे प्याज़ जैसे हों पर इन्हें किसी हालत में खाना नहीं है क्योंकि ये ज़हरीले हो सकते हैं। इनकी पत्तियों और जड़ों में अल्कलॉएड्स पाए जाते हैं।
हालांकि रेन लिली की पत्तियाँ और कन्द दक्षिण अमेरिकी देशों में कई तरह की घरेलू दवाइयाँ बनाने के काम आते हैं। पुराने समय से ही इनका प्रयोग ट्यूमर, ब्रेस्ट कैंसर, तपेदिक और गठिया जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है।
खैर… बाकी फायदे-नुकसान एक तरफ और रेन लिली के खूबसूरत फूल एक तरफ! इन्हीं खूबसूरत फूलों के लिए इन्हें बाग-बगीचों बड़े चाव से लगाया जाता है।
धूप और उजाला
रेन लिली के पौधे खुली धूप पसंद करते हैं। पर हल्की छाया और खूब उजाले वाली जगहों पर भी इन्हें रखा जा सकता है। इन्हें ऐसी जगह रखें जहाँ दिन में कम से कम चार घंटे की धूप आती हो।
पानी
रेन लिली के पौधों को प्यास बहुत लगती है। इसलिए इनकी मिट्टी हमेशा नम बनाए रखें। बारिश का पानी इन्हें खासतौर पर पसंद है। पर कन्द के पास पानी जमा न होने दें। नहीं तो उसमें फफूंद लग सकती है और पौधा सड़ भी सकता है।
मिट्टी
रेन लिली के बारे में एक अच्छी बात ये है कि किसी ख़ास किस्म की मिट्टी की ज़रूरत नहीं होती इन्हें। चिकनी, दोमट या रेतीली-बलुई मिट्टी में भी ये ख़ुश रहते हैं बशर्ते इन्हें पानी सही समय पर और सही मात्रा में मिलता रहे। आमतौर पर पानी पसंद करने वाले पौधे चिकनी मिट्टी में लगाए जाते हैं क्योंकि इसमें पानी ज्यादा समय तक बना रहता है और देर से सूखता है। इसलिए चिकनी मिट्टी में रेन लिली के पौधे लगाने से पानी देने में थोड़ी सहूलियत रहेगी। पर अगर चिकनी मिट्टी न हो तो किसी भी मिट्टी में इन्हें लगा सकते हैं।
पौधा कितना भी प्यासा क्यों न हो, गमले में लगाए हुए पौधों में पानी निकासी की जगह ज़रूर होनी चाहिए। ज़मीन में लगे हुए हों तो भी जलभराव की स्थिति नहीं बनने देनी है। यह पौधे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
खाद
इन सरल से पौधों के लिए खाद वगैरह की ख़ास ज़रूरत नहीं होती। पानी में पाए जाने वाले खनिज और पोषक तत्त्व ही इनके लिए काफी हैं।
अगर चटख रंगों वाले ढेर सारे स्वस्थ फूल चाहिए हों (किसे नहीं चाहिए भला!) तो इनके फूलने के मौसम में हल्की खाद दे सकते हैं। NPK के संतुलित अनुपात वाली कोई भी खाद कम मात्रा में इन्हें दी जा सकती है। ज्यादा खाद पौधे को जला सकती है। फॉस्फोरस की मात्रा थोड़ी सी ज्यादा रहेगी तो फूल खूब आएंगे। नाइट्रोजन ज्यादा हो गई तो ढेर सारी पत्तियाँ आएंगी। पोटैशियम पौधे को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचाने के लिए ज़रूरी है।
महीने में ज्यादा से ज्यादा एक बार ही इन्हें खाद दें। फूल खिलने का मौसम ख़तम हो जाए तो खाद देना बंद कर दें।
नए पौधे
रेन लिली के बल्ब (कन्द) को अलग-अलग करके कई सारे पौधे बना सकते हैं। इसके अलावा इनके फूल सूख जाने के बाद उनमें से बीज बन जाते हैं। इन बीजों से भी नए पौधे उगाए जा सकते हैं।
हालांकि आमतौर पर इन्हें बल्ब से ही उगाया जाता है। क्योंकि बीज बनाने में पौधा पानी बहुत सी ऊर्जा खर्च कर देता है और तब तक इन मौसमी फूलों के खिलने का समय चुक जाता है। इसलिए फूल मुरझाने के बाद बीज बनने से पहले ही जिस डंठल पर फूल उगा हुआ है उसे नीचे से तोड़ दें। ऐसा करने से पौधा अपनी पूरी ताकत से फूल देता रहेगा और पूरे चौमासे आपका पौधायन फूलों से भरा रहेगा।
देखभाल
इन पौधों को विशेष देखभाल की ज़रूरत नहीं होती। बारिश का मौसम गुज़र जाने के बाद अगर इन्हें पानी न मिला तो ये गाँठ बनकर ज़मीन के नीचे ही बैठ जाते हैं और फिर अगली बारिश में फिर से जी उठते हैं खिलते-खेलते हैं। जिन जगहों पर भीषण गर्मी या ज्यादा सर्दी पड़ती हो वहां ऐसे चरम मौसम में इनकी गांठों को ज़मीन से खोद कर सामान्य तापमान वाली सूखी जगह पर रख लें अगले मौसम में फिर से इन गांठों को रोप दें।
तो इस तरह ज़रा सी देखरेख में ये पौधे आपके पौधायन को खुशनुमा बना देंगे। ये देखने में जितने खूबसूरत हैं लगाने में उतने ही आसान हैं। इसीलिए बाग़वानी पसन्द करने वाले लगभग सभी लोगों के पास रेन लिली की कोई न कोई किस्म ज़रूर मिल जाएगी। तो बस… आज ही इन्हें आस-पास की किसी नर्सरी या परिचित के घर से ले आइए और अगले तीन-चार महीनों तक अपना पौधायन इन प्यारे-प्यारे फूलों से सजाइए।
इनको लेकर आपके मन में कोई और सवाल या सुझाव हो तो हमसे ज़रूर साझा करें।
मिलते हैं फिर से एक नए पौधे के साथ।
तब तक के लिए अपने पौधायन का ध्यान रखें। नमस्कार!!