नमस्कार दोस्तो!

दोस्तो, आज हम एक ऐसे पौधे से मुलाकात करने वाले हैं जो सदियों से लगातार उपेक्षित रहने के बावजूद तरह-तरह से हमारे काम आता रहा है। जिसने हमेशा जंगलों पहाड़ों में अलमस्त जीवन जिया है । लोगों ने अपने काम के लिए तरह-तरह से इसका दोहन और प्रयोग किया पर इसको कभी घर में जगह नहीं दी। क्योंकि एक तो ये कंटीला होता है और दूसरे इसका आकार-प्रकार भी काफी बड़ा होता है।

लेकिन आजकल की बात और है। बाज़ारवाद इन जैसे उपेक्षित पौधों के लिए वरदान बनकर आया है। मुनाफा कमाने के लिए हर तरह के रूप-रंग और आकार-प्रकार के पौधे बेचे जाने लगे हैं। लोगों की सोच और पसंद में भी बदलाव आया है। लोग अलग-अलग तरह के हर किस्म-ओ-प्रजाति के पौधे घरों में लगाना चाहते हैं। और इसके लिए हर किसी की सुविधा और ज़रूरत के लिहाज से एक ही पौधे की सैकड़ों छोटी-बड़ी प्रजातियाँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा कई तरह के पौधों को क्रॉस करा कर मनचाहे रंग-रूप और स्वभाव वाली तमाम संकर प्रजातियाँ भी बना ली गई हैं। जिससे किसी भी पौधे को घर में लगाना आसान हो गया है। ऐसा ही एक पौधा है- रामबांस, जिससे आज हम दोस्ती करने वाले हैं।

हिंदी में इसे रामबांस कहते हैं पर इसका वैज्ञानिक नाम अगावे(Agave) है। कभी जंगलों-पहाड़ों में घूमने जाते हुए आपने भी इन्हें अक्सर किनारे-किनारे या ढलान पर उगा हुआ देखा होगा। इनकी पत्तियाँ मोटी, चिकनी और नुकीली होती हैं। मोटी इसलिए कि जिससे ये अपने अन्दर पानी जमा कर सकें और जब भी ज़मीन में या हवा में पानी की कमी हो तब उसको अपने अन्दर जमा इस पानी से पूरा कर सकें। चिकनी इसलिए कि पत्तियों की सतह पर जो भी विकिरण पड़ें वो ज्यादा से ज्यादा परावर्तित (Reflect) हो जाएँ और पानी का वाष्पीकरण कम से कम हो। यही वजह है कि ये आपको पहाड़ों की तराई वाले इलाकों में अक्सर ढलान पर लटके हुए भी स्वस्थ, सुन्दर और ख़ुश ही नज़र आएँगे।

इनकी रसीली गूदेदार पत्तियाँ खाकर जानवर भी गर्मी में अपनी पानी की कमी को पूरा कर सकते हैं लेकिन… क्योंकि इन पत्तियों का सिरा भाले सरीखी नुकीला होता है इसलिए जानवर इन्हें नहीं खाते। पत्तियों को अगर काट कर देखें तो इनके अन्दर रेशे जैसी संरचनाएं दिखाई देंगी। ये रेशे इतने मजबूत होते हैं कि इन्हें गूँथकर रस्सियाँ भी बनाई जाती हैं। इन रेशों से कई तरह के हस्त शिल्प के सामान भी बनाए जाते हैं। फसलों को अगर जानवरों से बचाना हो खेतों के किनारे-किनारे इन्हें लगाया जा सकता है। कुछ ख़ास तरह के रामबांस के पौधों के रस से टकीला जैसी शराब की कुछ किस्में भी बनती हैं। इनकी पत्तियों को सुखाकर उनका पाउडर बनाकर कई तरह की दवाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है। पर यहाँ हम इसके बारे में चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि किसी भी पौधे का दवा के रूप में प्रयोग करने से पहले डॉक्टर की राय लेना बिल्कुल ज़रूरी है।

तो देखा आपने! यह उपेक्षित सा पौधा कितने काम का है। आइए अब देखते हैं कि घर में लगाने पर इनकी देखभाल कैसे करनी है।

मूल रूप से यह पौधा उत्तरी अफ्रीका के देशों में पाया जाता है। रसदार किस्म का ये पौधा गर्मी और सूखा सहन कर लेता है पर बहुत सर्दी, पाला या बर्फ़ बर्दाश्त नहीं करता। इसलिए ज्यादा सर्दी के मौसम में आप इन्हें छाया वाली जगह में रखिये। धूप इन्हें खूब भाती है तो भयंकर सर्दी के महीनों को छोड़कर पूरे साल आप इन्हें खुली धूप में ही रखिये। अगर घर में कोई जगह ऐसी नहीं है जहाँ ज्यादा देर तक सीधी धूप आती हो तो इनके ऊपर ग्रो लाइट ज़रूर लगाइए नहीं तो ये बहुत स्वस्थ नहीं रह पाएँगे और इनका आकार-प्रकार भी उतना आकर्षक नहीं रह जाएगा।

पानी इन्हें बहुत ही कम चाहिए इसलिए ऐसी मिट्टी में इन्हें रोपिए जिसमे पानी ठहरता न हो। कंकरीली-पथरीली-रेतीली मिट्टी में इन्हें लगाना अच्छा रहेगा। गमले में लगा रहे हैं तो ध्यान रखिये कि उसमें पानी निकलने के लिए नीचे छेद ज़रूर हो। ज्यादा अच्छा होगा अगर आप इसे ऐसे गमले में लगाएं जिसकी सतह से पानी वाष्पीकृत हो जाता हो जैसे मिट्टी या सीमेंट का गमला। पानी तभी दीजिए जब मिट्टी पूरी तरह से सूख गई हो।

उपेक्षा सहने की इनको आदत है, इसलिए… अगर आप पौधों का ज्यादा ध्यान नहीं रख पाते या आपके पास समय की कमी है या कई बार आपको घर से बाहर रहना पड़ता हो और फिर भी आप घर को हरा-भरा रखना चाहते हैं या आप पौधायन के शुरूआती दौर में हैं और ऐसा पौधा लगाना चाहते हैं जिसे मारना नामुमकिन हो, जो हर हाल में अपने जीने की वजह ढूंढ ले तो यह पौधा आपके लिए ही बना है। इन्हें घर में लगाकर भूल जाइये। नहीं के बराबर रखरखाव में भी ये खुशहाल बने रहेंगे

इनकी नीचे की पत्तियाँ अगर सूख गई हों या पतली और कमज़ोर हो गई हों तो उन्हें किसी तेज़ धार वाले चाक़ू से काट दीजिए। हर कुछ दिन में ऐसा करने पर पौधा हरदम सुन्दर बना रहेगा। खाद नहीं देंगे तो भी इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अगर पौधा ज्यादा कमज़ोर लग रहा हो तो कोई भी बैलेन्स्ड खाद बहुत कम मात्रा में दे सकते हैं। पौधे में नीचे की तरफ तने के पास से छोटे-छोटे कल्ले निकलते रहते हैं जिन्हें आप उखाड़कर या काटकर नया पौधा बना सकते हैं। छोटे पौधे को अलग करते समय अगर उसकी जड़ कट गई हो तो भी घबराने की ज़रूरत नहीं है। उसको नम मिट्टी में लगाने पर कुछ ही दिनों में उसमें नई जड़ें फूट आएंगी।

इनमें बीज भी होते हैं और उन बीजों से भी नए पौधे उगाए जा सकते हैं। पर इसके लिए आपको लम्बा इंतज़ार करना पड़ सकता है क्योंकि रामबांस की ज्यादातर किस्में मोनोकार्पिक होती हैं मतलब ये अपने पूरे जीवनकाल में एक बार ही फूल देते हैं। जब ये बड़े और मैच्योर हो जाते हैं तब इनमें एक मोटे डंडे जैसी लम्बी संरचना निकलती है जिसमें छोटे-छोटे फूल गुच्छों में खिलते हैं। इन्हीं फूलों में बाद में बीज बनते हैं। यह डंडा जंगली जानवरों की पहुँच से दूर काफ़ी लम्बा होता है इसलिए जंगल में भी बचा रहता है। एक बार फूल खिलने और बीज बनाने के बाद पौधा मर जाता है। फूलों के लिए डंडा निकलना इनके विकास का अंतिम चरण है। इस डंडे को अगर काट भी दिया जाए तो भी पौधा बचता नहीं है कुछ ही दिनों में सूखकर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। इनकी कई किस्मों की उम्र ६०-७० साल तक होती है। लम्बे समय तक जीने की वजह से इन्हें सेन्चुरी प्लांट भी कहा जाता है।

दुनिया भर में इनकी सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती है। आप अपनी पसंद, ज़रूरत, जगह और मौसम के हिसाब से सही किस्म चुनकर इन्हें अपने घर में लगा सकते हैं और बिना मेहनत या प्रयास के अपने पौधायन को सजा सकते हैं।

तो दोस्तों ये था हमारा आज का पौधा जो बिल्कुल ही ‘लो मेंटेनेंस’ है। जल्दी ही फिर मिलेंगे एक और अनोखे पौधे से। तब तक के लिए नमस्कार!  

Hi, I’m Paudhayan

प्रातिक्रिया दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!
hi_INहिन्दी

Discover more from पौधायन

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading