नमस्कार दोस्तो!

दोस्तो आज हम रंगीन पत्त्तियों वाले एक निहायत ही सरल और बला के खूबसूरत पौधे से दोस्ती करने वाले हैं।

पहचान

इस पौधे की पत्तियाँ चमकदार चटख रंगों वाली और किनारे से कटी-कटी सी डिज़ाइन वाली होती हैं। जी हाँ सही पकड़े हैं! हम कोलियस की बात करने वाले हैं। ये पौधे मिंट परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इस परिवार के और पौधों की तरह ही इनका तना भी चौकोर और पत्तियों विपरीत दिशा में होती हैं। इनमें नीले, गुलाबी या बैंगनी रंग के नन्हें फूल मंजरी में निकलते हैं (जैसे तुलसी में)।

कहाँ रखें

अपने पौधायन को आप खूबसूरत चटख रंगों से भरना चाहते हों तो कोलियस के पौधे आपके लिए बहुत शानदार विकल्प साबित होंगे। इन्हें आप किसी गमले में लगा सकते हैं या अलग-अलग रंगों वाले कई पौधों को एक साथ कतार में लगाकर बॉर्डर जैसा भी बना सकते हैं।

इन्हें पानी में भी बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है। कांच के जार में भरे साफ़ पानी में तैरती सफ़ेद झबरीली जड़ें और उसके बाहर सर निकाले हुए रंगीन पौधा किसी भी बेजान खिड़की या रोशनदान को जिंदा बना देगा।

प्रकाश

कोलियस के पौधे दक्षिण पूर्वी एशिया के द्वीपसमूहों के रहने वाले हैं। विषुवत रेखा के आस-पास वाला यह पूरा इलाका घने वर्षा वनों से ढका हुआ है। धरती को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन मुहैया कराने में ये जंगल सिर्फ़ अमेज़न के जंगलों से पीछे हैं। यहाँ खूब बारिश होती है और खूब गर्मी भी होती है।

इसलिए कोलियस को मध्यम से लेकर तेज़ धूप में रहना रास आता है (प्रजाति के हिसाब से)। हल्की धूप वाली जगहों पर इनकी पत्तियों के रंग खूब निखरते हैं। तेज़ धूप या गहरी छाया वाली जगहों पर पत्तियों के रंग ख़राब हो जाते हैं। सर्दी में पाला पड़ रहा हो या बर्फ़बारी हो रही हो तो इन्हें उठाकर छाया वाली जगह में रखिये। ज़मीन में लगा हो तो कपड़े से ढककर बचाव कीजिए।

पानी

कोलियस के पौधों को नियमित रूप से पानी चाहिए। गर्मी में रोज़ और सर्दी में दो-तीन दिन में एक बार इन्हें पानी ज़रूर देना है। इनकी मिट्टी हमेशा नम बनी रहनी चाहिए। उसे कभी पूरी तरह से सूखने न दें।

कुछ ज़रूरी बातें

इन्हें ख़ुश रखने के लिए बहुत ख़ास मेहनत की ज़रूरत नहीं है। ये तेजी से बढ़ने वाले पौधे हैं। इसलिए समय-समय पर इनकी कटाई-छँटाई ज़रूरी है।

ढेर सारी पत्तियों वाले घना पौधा बनाना हो तो लम्बी होती हुई डालों को काटते रहिये। और बड़ी पत्तियों वाला लम्बा पौधा चाहिए तो बगल वाली शाखाओं को एकदम नीचे से काट दीजिए और पौधे को प्राकृतिक रूप से बढ़ने दीजिए।

पौधा विकसित होने के बाद जब उसमें मंजरी और फूल आने लगें तो उन्हें तोड़ दीजिए क्योंकि पौधा अपनी सारी ऊर्जा फूल और बीज बनाने में खर्च कर देता है। नन्हें-मुन्ने सुन्दर लग रहे हों और इन्हें तोड़ने का मन न हो या नए पौधों को बीज से उगाना चाहें तो फूल आने के समय थोड़ी सी खाद पौधे को ज़रूर दीजिए।

नए कोलियस बनाने के तरीके – 3

कोलियस का पौधा जब पुराना हो जाता है तो उसकी नीचे की पत्तियाँ झर जाती हैं और डालों के सिर्फ़ ऊपरी सिरे पर पत्तियाँ रह जाती हैं। ऐसा पौधा बहुत अच्छा नहीं दीखता तो इस पौधे की डालों का ऊपरी करीब 6 से 8 इंच का सिरा काटकर ज़मीन में खोंस दीजिए। करीब हफ्ते भर में इनमें नई जड़ें निकल आएंगी और पौधे में बढ़त दिखनी शुरू हो जाएगी। इससे पौधों की संख्या भी बढ़ जाएगी और पुराने बेतरतीब हो चुके पौधे की जगह नए ताज़े पौधे फिर से तैयार हो जाएँगे।

डालों की इन कटिंग को पानी में भी लगा सकते हैं। इसके लिए इनका निचला सिरा करीब 2 इंच तक पानी में डूबाकर रखना होगा। 4-5 दिनों में ही उनमें से नई जड़ें पानी में निकलती हुई दिखाई देंगी। जब करीब 8-10 दिनों में ठीक से जड़ें निकल आएं तो इन्हें निकालकर ज़मीन में रोप सकते हैं। चाहें तो पानी में ही लगा रहने दें।

डाल के अलावा इन पौधों को बीज से भी बना सकते हैं। थोड़ा बड़ा होने पर डालों के ऊपरी सिरे पर मंजरी में फूल आते हैं। इन फूलों से ही बीज बनते हैं। मंजरी जब पक कर सूख जाए तब उससे बीज निकाल कर या यूँ ही नम ज़मीन पर छिड़क दीजिए। कुछ ही दिनों में नन्हे-मुन्ने कोलियस ज़मीन में उगे हुए नज़र आएँगे। तुरंत न लगाना हो तो इन बीजों को किसी सूखी जगह पर रख सकते हैं और जब चाहें तब नए पौधे उगा सकते हैं।

बस इतना ही तो करना है। और आपका पौधायन हमेशा रंगों से भरा रहेगा।

इनके बारे में कोई और सवाल हो तो कमेंट में ज़रूर पूछिये। और हाँ, यह लेख आपको पसंद आया हो या इसके बारे में कोई सुझाव हो तो भी हमें कमेन्ट में ज़रूर बताएं।

अगले हफ्ते एक और अनोखे पौधे से मुलाकात करेंगे। तब तक के लिए ….नमस्कार!

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