रंगभरा कैलेडियम

नमस्कार दोस्तो!
आज हम अपने पौधायन में एक बहुत ही प्यारे पौधे से मुखातिब होंगे जिसकी बड़ी-बड़ी रंग-बिरंगी पत्तियाँ दूर से ही मन मोह लेती हैं। इसे उगाना और लगाना बिल्कुल आसान है पर इसकी थोड़ी सी देखभाल भी ज़रूरी है।
नाम
इस खूबसूरत से पौधे का नाम कैलेडियम है। इसकी पत्तियाँ चौड़ी और काफी बड़े आकार की होती हैं। बड़ी-बड़ी पत्तियों के कारण इसे हाथी के कान (Elephant’s Ear), परी के पंख (Angel’s Wings) और मसीह के दिल (Heart of Jesus) जैसे नामों से भी जानते हैं।

पहचान
कैलेडियम के पत्ते देखने में घुइंयाँ या अरबी के पत्तों जैसे लगते हैं। पर जहाँ अरबी के पत्ते हरे होते हैं वहीं कैलेडियम के पत्ते खूब चटख सुर्ख (लाल), गुलाबी, सफ़ेद और हरे रंगों से सजे होते हैं। कुछ प्रजातियों में पत्तों का किनारा अलग रंग का तो कुछ में शिराएं भी अलग रंग में होती हैं। कुछेक के पत्तों में विरोधी रंगों की छींट या धब्बे जैसी बनावट भी नज़र आती है। यूँ लगता है जैसे किसी ने इनके पत्तों को कैनवस समझ कर अपनी मोटी सी कूची से तरह-तरह के रंगों से खूब खेला हो। इनमें तना नहीं होता। पत्तियाँ एक डंठल के सहारे सीधे जड़ से ही फूटती हैं। ये पौधे 1 से लेकर 2-2.5 फीट तक लम्बे हो जाते हैं।
मूल निवास
कैलेडियम के पौधे मूल रूप से अमेज़न नदी के बेसिन में मिलते हैं। प्राकृतिक रूप से ये नदी के किनारे वाली नम जगहों पर देखे जाते हैं। पर अपनी बेलौस ख़ूबसूरती की वजह से आजकल इन्हें पूरी दुनिया में घरों और बाग-बगीचों में बड़े प्यार से लगाया जाता है। तरह-तरह के रंगों और शेड्स वाली इनकी हजारों किस्में तैयार कर ली गई हैं। किसी में सुन्दर-सुन्दर चित्तियाँ हैं तो किसी में लाल सफ़ेद धब्बे। आप अपनी पसन्द और पौधें के रंग संयोजन के हिसाब से किसी भी किस्म का चुनाव कर सकते हैं।
धूप छाँव
ये पौधे विषुवतीय वर्षावनों में रहने वाले हैं। इस जगह गर्मी तो खूब पड़ती है पर जंगल इतने घने और पेड़ इतने ऊँचे होते हैं कि पत्तियों से छन कर बहुत थोड़ी सी धूप नीचे ज़मीन तक पहुँच पाती है और लगभग छाया ही बनी रहती है।
इसलिए कैलेडियम को हल्की धूप ही पसंद है। अगर आपके पौधायन में पेड़ हों तो उनके नीचे वाली जगह इनके लिए सबसे मुफ़ीद है। बड़े पौधायनों में दूर कोने वाली जगह जहाँ पेड़ों-लताओं की वजह से अँधेरा सा रहता है वहाँ इन्हें लगाइए। उस जगह में ढेरों रंग भर जाएँगे और वह अँधेरा कोना एकदम से खिल उठेगा। पौधायन में फव्वारा या पानी के आस पास वाली जगहें जो अक्सर नम बनी रहती हैं वहाँ भी ये ख़ुश रहते हैं। बड़े पेड़ या फव्वारा न भी हो इन्हें गमलों में भी आसानी से लगा सकते हैं।
कैलेडियम को हमेशा ऐसी जगह रखें जहाँ धूप सुबह कुछ देर के लिए आती हो। तेज़ धूप में इनके रंग उड़ जाते हैं और गहरी घनी काली छाया में पत्ते पीले पड़कर गिरने लगते हैं। अच्छी रोशनी और हल्की धूप वाली जगहें इनके लिए सबसे बढ़िया हैं।
मौसम
विषुवतीय क्षेत्रों में साल भर एक जैसा मौसम रहता है इसलिए वहाँ ये पौधे बारहमासी हैं। आपका पौधायन यदि विषुवतीय क्षेत्र में या उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में है तो ये पौधे साल भर पत्तियों से भरे-पूरे बने रहेंगे।
लम्बा सूखा और हाड़ कंपा देने वाली ठण्ड ये बर्दाश्त नहीं करते। तेज़ गर्मी में अगर इन्हें नियमित रूप से पानी न मिले तो कैलेडियम के पौधे सुषुप्त अवस्था में चले जाते हैं। ऐसे समय में पौधे की पत्तियाँ एक-एक कर के धीरे-धीरे सूखती जाती हैं और पौधा अपनी सारी ऊर्जा एक गाँठ में संजो कर ज़मीन के अन्दर गहन निद्रा में चला जाता है। ज्यादा सर्दी पड़ने पर भी पौधा ठीक ऐसा ही करता है। इसलिए समशीतोष्ण, शीतोष्ण और रेगिस्तान जैसी जगहों पर ये मौसमी पौधों की तरह लगाए जाते हैं।
पौधा जब पत्तियाँ गिराकर सुषुप्तावस्था में चला जाए तो उसकी गाँठ को ज़मीन में पड़ा रहने भी दे सकते हैं और इसे निकाल कर किसी सूखी जगह में रख भी सकते हैं। मौसम अनुकूल होने पर और पानी मिलने पर इसमें से फिर नई पत्तियाँ फूटेंगी और पौधा फिर अपनी छटा बिखेरेगा। किसी गमले में लगा रखा है तो इस गाँठ को निकाल लीजिए और सही जगह में रख लीजिए। इसे सड़ने से बचाने के लिए बहुत नम जगह में न रखें।

पानी
जिस जगह में ये पौधे रहते आए हैं वहां खूब बारिश होती है इसलिए पानी इन्हें खूब भाता है। इनकी मिट्टी हमेशा नम बनाए रखें लेकिन जलभराव की स्थिति न बनने दें। पानी जमा होने पर इनकी गाँठ वाली जड़ों में फफूंद लग सकता है और गाँठ सड़ भी जाती है।
तेज़ गर्मी में भी ये हरे-भरे बने रहते हैं बशर्ते इन्हें समय-समय पर सही मात्रा में पानी मिलता रहे। गर्मी में इन्हें हर रोज़ या एक दिन के अन्तर पर पानी देना है। सर्दी में तीन से चार दिन में पानी दे सकते हैं। ज्यादा सर्दी में ये सुषुप्त हो जाते हैं।
नए पौधे
कैलेडियम की गाँठ मिट्टी में धीरे-धीरे बड़ी होती रहती है और उसमें कई जगह से पौधे निकलते रहते हैं। इस गाँठ में कई जगह आँख सी बनी होती है वैसी ही जैसी आलू या घुइंयाँ के कन्द में होती है। इन्हीं जगहों से नई पत्तियाँ और जड़ें निकलती हैं। इस गाँठ को इस तरह से काटिए कि हर टुकड़े में कम से कम एक आँख ज़रूर हो। अब इन टुकड़ों को कुछ दिन के लिए छोड़ दें जिससे कटी वाली जगह इतनी सूख जाए कि नम ज़मीन में गाड़ने पर सड़े नहीं। अब इन टुकड़ों को करीब 8 से 10 इंच की दूरी पर नम मिट्टी में लगभग 2-2.5 इंच की गहराई में इस तरह से दबा दीजिए कि गाँठ का आँख वाला हिस्सा ऊपर की ओर रहे। मिट्टी को नम बनाए रखें। कुछ ही दिनों में आपको सभी गांठों में से नई पत्तियाँ फूटती नज़र आएंगी। इस तरह एक गाँठ से कई पौधे बनकर तैयार हो गए हैं।

ध्यान रखें कि
कैलेडियम के पौधे अपने अकार-प्रकार में चाहे अरबी जैसे लगें पर इनमें कैल्शियम ओक्ज़ेलेट के क्रिस्टल पाए जाते हैं जो कि एक जहरीला पदार्थ है इसलिए इन पौधों का कोई भी भाग खाने के काम नहीं आता। इन्हें सिर्फ ख़ूबसूरती के लिए घर में लगाएं और बच्चों या पालतू जानवरों की पहुँच से दूर रखें। इसलिए लज़ीज़ सब्जियाँ, भाजियाँ, भजिया और पकौड़ियाँ खानी हों तो अरबी के पौधे ही लगाएं।
इस तरह थोड़ा सा ध्यान रखने पर इन हर दिल अज़ीज़ पौधों से किसी भी पौधायन की शोभा बढ़ाई जा सकती है। ये किसी भी पौधशाला में आसानी से मिल भी जाएँगे। इनकी गांठें भी खरीद कर तैयार कर सकते हैं। कैलेडियम के बारे में कुछ और सवाल हों तो कमेंट में ज़रूर पूछिए। आपके सुझावों और सवालों का हमेशा इंतज़ार रहता है हमें।
जल्दी ही एक और प्यारे पौधे से मुलाक़ात करेंगे। तब तक के लिए…
नमस्कार!