नमस्कार दोस्तो! उम्मीद है आपका पौधायन खूब हरा-भरा होगा।

आज हम बात करेंगे एक ऐसे पौधे के बारे में जिसे मारना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 11 से ज्यादा मुल्कों की पुलिस इन्हें मारने की फ़िराक में है। पर ये आउट ऑफ़ कंट्रोल हो चुके हैं। इसको आमतौर पर मदर ऑफ़ थाउज़ैन्ड्स के नाम से पहचानते हैं। कुछ और नामों से भी बुलाते हैं इन्हें जैसे मैक्सिकन हैट प्लांट, एलीगेटर प्लांट वगैरह पर सबसे आसानी से मदर ऑफ़ थाउज़ैन्ड्स नाम ही नज़र आता है। इसको देखते ही आपके दिमाग में अनायास ही कौंध जाएगा- “हज़ारों बच्चे!” और “हज़ारों बच्चों की माँ!” यही हज़ारों बच्चे इस पौधे की पहचान हैं और इसे सबसे अलग और अद्भुत बनाते हैं।

इसका वैज्ञानिक नाम कैलंचो देग्रेमोंटियाना (kalanchoe daigremontiana) है। जी हाँ! यह उसी कैलंचो प्रजाति का पौधा है जिसके कुछ सदस्यों को आप खूबसूरत गुच्छेदार फूलों के लिए और कुछ को उनकी रंग-बिरंगी पत्तियों के लिए घरों में लगाते हैं। ये सभी प्रजातियाँ एक ही परिवार की हैं और आपस में इनका भाई-बंधुओं का रिश्ता है।

मदर ऑफ़ थाउज़ैन्ड्स इस पौधे की पत्तियाँ हल्की नीलिमा लिए हुए हरे रंग की मोटी और चिकनी होती हैं जिनके किनारे कटिंग जैसी डिज़ाइन बनी होती है। जब पत्ती थोड़ी बड़ी हो जाती है तो उसके किनारे की हर एक कटिंग वाली जगह से एक नन्हा सा पौधा निकलता है। लाइन से लगे हुए ये ढेर सारे छोटे-छोटे पौधे बहुत ही सुन्दर लगते हैं। यही इस पौधे की खूबसूरती है और यही इसकी ख़ासियत है। अपने प्राकृतिक आवास में ये पौधे 3 फीट तक लम्बे हो सकते हैं पर घरों के बंद वातावरण में ये अक्सर छोटे ही रहते हैं।

जैसे अपने भारतीय उप प्रायद्वीप के नीचे छोटा सा श्रीलंका दीखता है वैसे ही अगर आप विशाल अफ्रीका महाद्वीप के नक़्शे को देखें तो नीचे एक छोटा सा द्वीप दिखाई देगा जिसका नाम मेडागास्कर है। आज का हमारा पौधा इसी छोटे से द्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग का मूलनिवासी है। द्वीप का यह हिस्सा सूखा और पथरीला है। सूखे और चट्टानी रेगिस्तान जैसी जगह पर विकसित होने के कारण यह अधिक तापमान, भीषण गर्मी और चरम सूखा बर्दाश्त करने में सक्षम है।

अगर आपके पौधे बचते नहीं या आप बहुत ध्यान नहीं रख सकते उनका या आपके पास समय कम रहता है या कई बार आपको घर से बाहर रहना पड़ता है तो ये पौधा आपके लिए ही बना है। पानी इसे बहुत कम चाहिए। तो जब गमले की मिट्टी पूरी तरह से सूख जाए तभी इसे पानी देना है। मिट्टी भी इसके लिए ऐसी होनी चाहिए जिसमें पानी ठहरता न हो। जैसी मिट्टी हम बाकी कैक्टस और सक्युलेंट्स के लिए प्रयोग में लाते हैं वह इनके लिए भी सही रहेगी। गमले में छेद ज़रूर होना चाहिए जिससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। ज्यादा धूप में ये मरते नहीं बस इनके पत्ते थोड़े गुलाबी या लाल पड़ जाते हैं।

खाद की ख़ास ज़रूरत नहीं होती इन्हें। बिना खाद के भी ये अच्छी तरह बढ़ते हैं और खूब सारे छोटे-छोटे पौधे पैदा करते रहते हैं। पर अगर पौधा कमज़ोर लग रहा हो या तेज़ बढ़त चाहिए हो तो कोई भी बैलेंस्ड खाद बहुत कम (लगभग चौथाई) मात्रा में इन्हें दी जा सकती है।

सिर्फ एक ही चीज़ से ये डरते हैं और वो है बहुत ज्यादा सर्दी। तो आपको ज्यादा सर्दी से इन्हें बचाना है। इसलिए बहुत कम तापमान में बर्फ़ या पाला पड़ने के समय इन्हें खुले आसमान के नीचे न रखें।

सक्युलेंट्स और कैक्टस की एक समस्या होती है कि कम रोशनी वाली जगहों पर ये अक्सर ‘लेगी’ हो जाते हैं मतलब उजाले की दिशा में बहुत ज्यादा लम्बे हो जाते हैं… पत्तियाँ सघन नहीं रह जातीं बल्कि बहुत दूर-दूर और विरल हो जाती हैं… और पौधा अपने असल आकार को खो देता है। ऐसे में ये देखने में उतना सुन्दर नहीं रह जाता। सक्युलेंट क़िस्म का पौधा होने के नाते यह समस्या इन पौधों के साथ भी आती है। इससे बचने के लिए आपको इन्हें धूप या खूब उजाले की जगह में रखना होगा। इसके लिए आप इन्हें खुले में रख सकते हैं। खुली जगह न हो तो इन्हें पूरब या दक्षिण की ओर खुलने वाली खिड़की पर भी रखा जा सकता है। अगर धूप एक ही दिशा से आ रही हो जैसे बालकनी या खिड़की जैसी जगहों में अक्सर होता है तो वहां पर पौधे को हर कुछ दिन में घुमाते रहिये जिससे उसकी बढ़त चारों तरफ अच्छी तरह से हो।

इनकी संख्या बढ़ाना कितना आसान है ये तो इनके नाम से ही जाहिर है। अगर आपके पास इसका मैच्योर पौधा है तो ख़ुद को फैलाने की चिंता ये ख़ुद कर लेगा। आपको कुछ भी नहीं  करना है। हर एक बड़ी पत्ती के किनारे-किनारे छोटे पौधे बनेंगे और हल्का सा अघात लगते ही या थोड़े बड़े होने पर ये झर जाएँगे। इन झरे हुए नन्हें पौधों को अगर थोड़ी सी भी नमी मिलती रही तो ये धीरे-धीरे बढ़ना शुरू कर देंगे।

पौधे ज्यादा हो गए हों और हटा कर फेंकने हों या दूसरी जगह डालकर नए पौधे बनाने हों या किसी को देने हों तो अपनी हथेली को किसी भी ऐसी पत्ती के नीचे रखिये जिसके किनारे-किनारे ढेर सारे बच्चे चिपके हों और फिर अंगूठे से उनको झाड़ लीजिए। और मुट्ठी भर छोटे पौधों को किसी नम जगह या गमले में डाल दीजिए कुछ ही दिनों में ये बड़े हो जाएँगे।

पत्ती अगर बड़ी या मैच्योर न हो और उसके किनारे छोटे पौधे न आए हों तो भी उस पत्ती को गीली मिट्टी में डालने पर उसमें से नए पौधे निकल आते हैं।

पौधा अगर ‘लेगी’ हो गया हो या एक तरफ को झुक गया हो तो बेधड़क आप इसे ऊपर से काट दीजिए और दोनों हिस्सों को अलग-अलग रोप दीजिए। कुछ ही दिनों में उनमें नई पत्तियाँ और जड़ें आ जाएंगी।

ज्यादा मैच्यों होने पर इनमें फूल घंटी के अकार के फूल भी आते हैं और उनसे बीज भी बनते हैं। इन बीजों से भी नए पौधे उगाए जा सकते हैं हालांकि इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती।

ये पौधे बहुत तेजी से फैलते हैं इसलिए इनके साथ थोड़ी सावधानी बरतना ज़रूरी है। अगर आप अपना पूरा पौधायन इनसे ही नहीं भर लेना चाहते हैं तो कोशिश कीजिए कि इन्हें एक ही गमले में लगाइए और उस गमले को बाकी गमलों और कच्ची ज़मीन से दूर रखिये जिससे इनके बच्चे गिरकर दूसरे गमलों में न फैलें। ज़मीन में इन्हें बिल्कुल भी मत लगाइए। यह भी ध्यान रखिये कि ये पौधे ज़हरीले होते हैं। इनसे निकलने वाला रस दूध जैसे सफ़ेद रंग  का गाढ़ा चिपचिपा सा तरल होता है। इसे छू लेने पर त्वचा लाल पड़ सकती है… जलन भी हो सकती है। फिर भी अगर गलती से यह रस कहीं छू ही जाए तो उस जगह पर घृतकुमारी(एलोवेरा) का रस लगाइए। घर पर अगर कुत्ते-बिल्लियाँ या छोटे बच्चे हों तो उनकी पहुँच से इसे दूर रखिये। इन्हें खाने पर पेट में जलन, ऐंठन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। ज्यादा निगल लिया हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए।

तो यह था हमारा आज का पौधा। जो निहायत ही सरल सुशील है और आपकी बेरुखी और बेवफ़ाई सहन करने को हरदम तैयार है। इसका कोई रख-रखाव नहीं करना है आपको… अपना ध्यान यह ख़ुद रख लेगा। बस थोड़ा ज़हरीला है तो इसे हमेशा दस्ताने पहनकर बरतिए। और पालतू जानवरों और बच्चों से दूर रखिये। फिर यह आपको शिकायत का मौका नहीं देगा।

तो दोस्तो जल्दी ही फिर मिलेंगे एक नए और बहुत ही आसान पौधे के साथ।

तब तक के लिए नमस्कार!

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