जेड प्लांट

नमस्कार दोस्तों! पौधायन में आपका स्वागत है। उम्मीद है आपका पौधायन खूब फल-फूल रहा होगा।
घर में तरह-तरह के ढेर सारे पौधे हों और आने वाले लोग उन्हें लेकर अपनी-अपनी राय न दें ऐसा तो हो ही नहीं सकता। कोई कहेगा कैक्टस घर में मत लगाओ कोई कहेगा सक्क्युलेंट्स मत लगाओ। कोई बताएगा ऐसे पौधे मत लगाओ जिनसे दूध निकलता हो कोई कहेगा ऐसे मत लगाओ जिनमें कांटे होते हों। हमारे घर में कई फलते-फूलते पेड़ इस तरह बलि चढ़ गए। लब्बोलुआब यह कि कोई इक्का-दुक्का पौधा ही ऐसा होता है जिसके बारे में आम सहमति हो कि उसके होने से घर वालों पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।
यह समस्या शाश्वत है। इससे बचने के दो उपाय हैं। या तो आप इन लोगों और उनकी बिना मांगे दी गई राय को सिरे से अनदेखा कर दें या फिर ऐसे पौधे लगाएं जिन्हें घर में रखना शुभ समझा जाता है।
फ़ायदे
ऐसा ही एक पौधा है जेड प्लांट। आप घर पर पौधायन बनाना छाहते हैं लेकिन आपके घर पर भी ऐसे मेहमानों का प्रकोप रहता है जो आए दिन एक पौधे को अशुभ बताते हैं तो आप इस पौधे को लगाइए। चाइनीज़ फेंग शुई हो या भारतीय वास्तु शास्त्र हर जगह इस पौधे को घर में लगाना शुभ बताया गया है।
दूसरी बात यह कि यह पौधा देखने में भी उतना ही खूबसूरत है और बिना किसी ख़ास देखभाल के भी सालों तक खूब स्वस्थ और सुन्दर बना रहता है। साथ ही हवा से कई ज़हरीले पदार्थों मसलन फ़ॉर्मेल्डिहाइड और बेंज़ीन वगैरह को साफ़ भी करता है।
नाम
जेड हरे रंग की पत्तियों की वजह से इस पौधे को आमतौर पर जेड प्लांट के नाम से जानते हैं। कहते हैं इन्हें लगाने से घर में सूख-शांति और समृद्धि आती है। इसलिए इन्हें मनी प्लांट, लकी प्लांट, फ्रेंडशिप ट्री जैसे नामों से भी जानते हैं। विज्ञान की भाषा में इनको क्रसुला ओवाटा कहा जाता है।
जान-पहचान
गहरे हरे रंग की छोटी-छोटी मोटी-मांसल और चमकदार पत्तियाँ और गहरा भूरा मोटा तना छोटे से पेड़ जैसे लगते हैं। इनका बोनसाई बनाना भी आसान है। काट-छांट न की जाए तो कुछ ही दिनों में डालें लम्बी होकर लटकने लगती हैं। इसलिए इन्हें लटकने वाले पौधे जैसा भी सजा सकते हैं। पत्तियों के अलग-अलग आकार-प्रकार और रंगों वाली इनकी कई तरह की किस्में भी हैं। आप अपनी पसन्द, जगह और ज़रूरत के हिसाब से किसी भी जेड प्लांट को अपने लिए चुन सकते हैं।
धूप – छाया
ये पौधे प्राकृतिक रूप से अफ्रीका महाद्वीप के कुछ देशों-द्वीपों में पाए जाते हैं। ये जगहें बहुत गर्म और सूखी हैं इसलिए यहाँ रचा-बसा यह पौधा भी खूब गर्मी और सूखा सह सकता है। पर इन्हें बहुत ज्यादा सर्दी, पाला या बर्फ़बारी वाले मौसम की आदत नहीं है। तो ऐसे मौसम में इन्हें छाया में या घर के अन्दर रखें। बाकी दिनों में इनको रखने की जगह ऐसी हो कि अच्छी धूप आती हो और खूब उजाला रहता हो। हालांकि कम उजाले वाली जगह में और घर के अन्दर भी ये स्वस्थ रहते हैं पर ज्यादा दिनों तक ऐसे रखने पर इनकी डालें ‘लेगी’ हो जाती हैं। ऐसे में पौधे का आकार-प्रकार सही रखने के लिए इनकी कटाई-छंटाई आपको जल्दी-जल्दी करनी पड़ेगी। ज्यादा अँधेरे में रखने पर पत्तियाँ पीली पड़कर झर जाती हैं। प्राकृतिक रोशनी नहीं या कम होने पर इनके ऊपर ग्रो लाइट ज़रूर लगाएं जिससे पौधे का रूप भी अच्छा रहे और उसकी बढ़त भी अच्छी हो।
पानी
पानी इन्हें बहुत ही कम चाहिए। पानी तभी दें जब पौधे की मिट्टी पूरी तरह से सूख गई हो। सर्दी के दिनों में पौधा घर के अन्दर रखा है तो 15 से 20 दिन में एक बार पानी देना काफ़ी है। गर्मी के दिनों में सप्ताह में एक बार पानी दे सकते हैं। खुले में रखने पर इस अंतराल को आधा कर दें।
मिट्टी
किसी ख़ास तरह की मिट्टी की दरकार इन्हें नहीं होती। पर सबसे ज़्यादा ख़ुश ये कंकरीली-पथरीली-रेतीली मिट्टी में रहते हैं। ऐसी मिट्टी न हो तो चिकनी मिट्टी में ही थोड़ी सी रेत और कंकड़ मिलाकर मिट्टी तैयार कर लें। यह भी न कर सकें तो चिकनी मिट्टी में ही लगा दें और पानी थोड़े ज्यादा अंतराल पर कम मात्रा में दें। क्योंकि चिकनी मिट्टी में पानी जल्दी सूखता नहीं।
गमला
जिस भी गमले या बर्तन में इन्हें लगाएं उसकी तली में पानी निकलने के लिए छेद ज़रूर हों। सजावट के लिए धातु के या बिना छेद वाले गमले में लगाना हो तो इन्हें सीधे ही उसमें न लगाएं। बल्कि किसी साधारण छेद वाले गमले में लगाकर उसके समेत ही पौधे को सजावटी गमले में रख दें।
खाद
जेड प्लांट को खाद की ख़ास ज़रूरत नहीं होती। पर स्वस्थ सुन्दर पौधे के लिए इन्हें कोई भी संतुलित खाद कम मात्रा में महीने में एक बार दी जा सकती है।
देखभाल
ये सरल से पौधे किसी ख़ास देखभाल के बिना भी भले चंगे बने रहते हैं। काफ़ी दिनों तक काट- छांट न करने पर इनकी डालें लम्बी-लम्बी होकर लटक जाती हैं। कुछ लोग इन्हें तरतीबवार ढंग से काट कर लटकने के लिए ही छोड़ देते हैं। पर अगर आप जेड प्लांट का बोनसाई तैयार करना चाहते हों या फिर उसे पेड़ जैसा सीधा रखना चाहते हों तो डालों को लम्बा न होने दें और समय-समय पर उनकी काट-छांट करते रहें। डालों को काटने से तना मोटा और मजबूत होकर ज्यादा वजन संभालने के लिए तैयार हो जाता है। फिर नई डालें भी मोटी निकलती हैं और कुछ ही सालों में अच्छा बोनसाई बनकर तैयार हो जाता है। इस तरह यह पौधा बिना आपको परेशान किये घर के माहौल को खुशनुमा और हरा-भरा बनाए रखेगा। आपको अक्सर घर के बाहर रहना पड़ता हो, घूमने का शौक़ भी हो और पौधायन भी बनाना हो, पौधों की देखभाल के लिए ज्यादा समय भी न हो तो भी बेफ़िक्र होकर इन्हें लगाइए। ये पौधे आपके शानदार साथी साबित होंगे।
तो दोस्तो ये था हमारा आज का पौधा। इनके बारे में कोई और जानकारी हो सवाल हो या समस्या हो तो ज़रूर पूछें और बताएं। जल्दी ही फिर मिलेंगे एक और अजब पौधे के साथ। तब तक अपने पौधायन का ध्यान रखिए।
नमस्कार!