गेंदा

बसंत की बहार हो और गुलशन में गेंदा गुलज़ार हो तो फिर समझिये कि जन्नत की खूबसूरती धरती पर उतर आती है। बसंत और गेंदा मुझे पर्याय से लगते हैं। किसी भी और फूल में वो बात नहीं कि अकेला पूरे उत्सव की कमान संभाल सके। दीवाली की रंगोली हो या रंगों की होली हो, शादी हो या हल्दी, घर हो या मन्दिर कोई भी भारतीय उत्सव गेंदे के फूलों के बिना मनाया ही नहीं जा सकता।
जान-पहचान
ये फूल देखने में खूब चटख रंगों वाले और तेज़ मादक सुगंध से भरे होते हैं। कुछ कीट-पतंगे और पालतू जानवर गेंदा की तीखी महक के कारण इनसे दूर रहते हैं। पर तितलियों और मधुमक्खियों को यह खूब पसंद है। ये इन फूलों के परागण में मदद करती हैं। कुछ मीठी कुछ तीखी इनकी महक कुछ को भाती है कुछ को देर से समझ में आती है। इसीलिए तो… ससुराल गेंदा फूल!!
तरह-तरह के फूल
गेंदा की तीन प्रजातियाँ काफी प्रचलित हैं। एक जिसमें छोटे-छोटे कत्थई, नारंगी और बसंती पीले रंग के फूल होते हैं। यह फ्रेंच गेंदा है। इनके रंग सबसे गहरे और कंट्रास्ट बनाते हुए होते हैं। इस किस्म के पौधे छोटे और झाड़ीनुमा होते हैं। ये ज्यादा लम्बे नहीं होते पर इनमें ढेर सारी शाखाएँ होती हैं। ये 6 इंच से लेकर 2 फीट तक के हो सकते हैं।

दूसरे जिन्हें हम हज़ारा के नाम से जानते हैं। ये फूल काफ़ी बड़े आकार के ढेर सारी पंखुड़ियों से भरे होते हैं। ये अफ्रीकी गेंदा के नाम से मशहूर हैं हालांकि इनका जन्मस्थान मध्य अमेरिका में है। ये फूल बिल्कुल हल्के पीले, बसंती, और नारंगी रंग में मिलते हैं। इस किस्म के पौधे 3 से 4 फीट तक लम्बे और कम घने होते हैं।

तीसरी अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय प्रजाति भी है गेंदा की जिसमें छोटे आकार के फूलों में पंखुड़ियों की एक ही परत होती है। इसका पौधा महज एक फुट ऊँचाई का ही होता है। इन्हें बगीचों के किनारे-किनारे या किसी बड़े पौधे के आस-पास की खाली जगह भरने के लिए लगाते हैं।

जगह और ज़रूरत के हिसाब से आप अलग-अलग तरह के गेंदा लगा सकते हैं। रंगोली बनाने या कहीं बिछाने के लिए ढेर सारी पंखुड़ियाँ चाहिए या बड़े-बड़े लड्डू जैसे गोल फूल पसंद हैं तो हज़ारा गेंदा अच्छा है। गहरे कत्थई और बसंती रंगों के कंट्रास्ट से सजे भर-भर कर खिलने वाले फूल चाहिए तो फ्रेंच गेंदा लगाइए। और अगर कुछ छोटे पौधे एक साथ पास-पास लगाकर फुलवारी सी बनानी है तो एक परत वाले छोटे गेंदा का प्रयोग कर सकते हैं।
कैसे उगाएं
गेंदा के पौधे बीजों से तैयार किये जाते हैं। हज़ारा गेंदा तैयार होने में काफ़ी समय लेता है इसलिए समय और जगह कम हो तो इनके छोटे पौधे नर्सरी से खरीद लाएं। बाकी सभी किस्मों के पौधे बीज बोकर आसानी से तैयार कर सकते हैं। इसके लिए नम भुरभुरी मिट्टी में लगभग 1 इंच की गहराई में बीज बो दें। पौधे थोड़े बड़े हों तो किस्म के हिसाब से उन्हें 6 इंच से 1 फुट की दूरी पर रोप दें।
फिर पौधा जब ख़ुद को सँभालने लायक हो जाए तो उसके ऊपर की कुछ छोटी पत्तियों को तोड़ दें। ऐसा करने से उसमें ज्यादा शाखाएँ आएंगी। अब जितनी ज्यादा शाखाएं उतने ज्यादा फूल।
धूप-छाया
सर्दी में अच्छी धूप वाली जगहों पर इन्हें गमले या ज़मीन में लगा सकते हैं। पौधों को ठीक से धूप न मिलने पर पत्तियों के ऊपर सफ़ेद पाउडर सा जम जाता है। यह एक तरह का फफूंद है जो पौधे को नुकसान पहुंचाता है।
मिट्टी
अच्छे स्वस्थ पौधों और खूब फूलों के लिए गेंदा को उपजाऊ दोमट मिट्टी में लगाएं। दोमट न मिले तो इसे चिकनी मिट्टी में रेत मिलाकर तैयार कर लें। मिट्टी में ज्यादा देर तक पानी रुकना नहीं चाहिए।
अच्छी मिट्टी न उपलब्ध हो तो उसमें समय-समय पर खाद देते रहें।
दाना-पानी
यदि आप बीज से पौधे तैयार कर रहे हैं और मिट्टी बहुत उर्वर नहीं है तो पहले उसमें थोड़ी खाद मिलाकर तब बीज बोएं। इसके बाद तभी खाद दें जब पौधा फूल देने को बिल्कुल तैयार हो। बढ़त के समय खाद देने से पौधा उसका प्रयोग घना होने और ढेरों पत्तियाँ उगाने में कर लेगा और फूल कम पैदा करेगा। इनमें जो खाद डाल रहे हों उसमें फॉस्फोरस की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए। 1:2:1 NPK के अनुपात वाली कोई भी खाद इनमें दी जा सकती है। बाज़ार में ख़ास फूल वाले पौधों के लिए अलग से भी खाद उपलब्ध हैं, उनका प्रयोग भी कर सकते हैं।
गेंदा का पौधा सूखा सहन करने में समर्थ है। इसलिए इसमें तीन से चार दिनों के अंतराल पर या जब मिट्टी पूरी तरह से सूख जाए तब अच्छी तरह से पानी दें।
फ्रेंच गेंदा थोड़ी नमी पसंद करता है। इसमें कम समय अन्तराल पर पानी दें।
पानी देते समय ध्यान रखें कि जड़ के पास ही पानी दें। पत्तियों और फूलों में पानी न दें। पत्तियों पर पानी जमा होने से इन पर सफ़ेद पाउडर जैसा फफूंद लग सकता है जो पौधे की बढ़त और फूलों के लिए नुकसानदायक है। फूलों पर देर तक नमी रहने से उनकी पंखुड़ियाँ सड़ने लगती हैं।
देख-रेख
मुरझाए हुए फूलों और सूखते फूलों को तोड़ते रहिये। इसके लिए फूल के डंठल को सबसे ऊपरी पत्ती के पास से तोड़कर अलग कर दें। ऐसा करने से नए फूल ज्यादा आएंगे और पौधा सजीला बना रहेगा। नहीं तो पौधा अपनी ताकत का उपयोग बीज बनाने में करने लगता है। फिर नए फूल आना जल्दी बंद हो जाता है और पौधा सूख कर मर जाता है।
बीज तैयार करने के लिए कुछ बड़े और लगभग सूख चुके स्वस्थ फूलों को पौधे से तोड़ कर अलग कर लें और उनका माला जैसा बनाकर उल्टा टांग दें। अच्छी तरह से सूखने के बाद इनसे बीज अलग कर लें या फिर ऐसे ही इन्हें किसी ठंडी सूखी और छायादार जगह में रख दें। अगले मौसम में इनसे नए पौधे तैयार कर लें।
कीट-पतंगे
आमतौर पर इन पौधों का ख़ास ध्यान नहीं रखना पड़ता पर कभी-कभी इनमें स्पाइडर माइट्स या एफिड जैसे कीटों से संक्रमण देखने को मिलता है। इसे दूर करने के लिए पौधे पर पहले साबुन के पानी का छिड़काव करें फिर एक-दो दिन के बाद किसी हल्के कीटनाशक का प्रयोग करें।
अन्ततः
गेंदा के फूल आपके पौधायन को सोने और ताम्बई रंगों से सजा देंगे। फूलों पर मंडराती तितलियाँ और हवा में पिघली इनकी सुगन्ध मन में भी वसन्त ला देगी।
तो दोस्तो, इस तरह ज़रा सी देख-रेख से अपने पौधायन को आप वसंत के लिए तैयार कर सकते हैं।
इन पौधों से जुडी कोई और जानकारी साझा करनी हो या कोई बात जाननी हो तो टिप्पणी कर हमें ज़रूर बताएं। आपके सुझावों शिकायतों की प्रतीक्षा में…
आपका अपना पौधायन!!
