गमला: सामग्री

नमस्कार दोस्तो! उम्मीद है आपका पौधायन खूब हरिया रहा होगा। दोस्तो आज हम पौधायन के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ के बारे में बात करेंगे।
अव्वल तो पौधायन बनाने के लिए सिर्फ एक ही चीज़ ज़रूरी है- एक पौधा या महज एक बीज। इस एक बीज से ही धीरे-धीरे पूरा पौधायन तैयार किया जा सकता है। इसके लिए केवल ज़रा सी ज़मीन या थोड़े से पानी की दरकार होगी। पर अगर कच्ची ज़मीन न हो तो पौधे के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है उसका गमला। पौधा किस तरह के गमले में लगा है इसका उसकी सेहत, बढ़त और नए पौधे पैदा करने की उसकी क्षमता पर ख़ासा असर पड़ता है।
इसलिए गमला हमेशा पौधे की प्रकृति के हिसाब से खरीदें। गमला किस चीज़ का बना हो, उसका डील-डौल क्या हो, लम्बा हो या आड़ा, आकृति कैसी हो और उसके मुँह का आकार-प्रकार क्या हो यह सब कुछ आपको अपने पौधे के अनुसार ही तय करना है। इन सबके बारे में हम एक-एक करके चर्चा करेंगे।
आज हम गमला बनाने में प्रयोग की गई सामग्री पर बात करेंगे। बाज़ार में मिट्टी और सीमेंट जैसे साधारण सस्ते गमलों से लेकर लकड़ी, बांस, सिरेमिक, पत्थर, प्लास्टिक, फोम, फाइबर और धातु जैसे पीतल, ताम्बे या लोहे जैसी चीज़ों से बने ढेरों तरह के गमले अलग-अलग आकार-प्रकार और कीमतों में मौजूद हैं। ऐसे में अक्सर यह संशय बना रहता है कि अपने घर, अपने पौधों और अपने बजट के हिसाब से कौन सा गमला खरीदना सही रहेगा।
किस तरह का गमला आपके लिए सबसे मुफ़ीद है यह पौधे की प्रकृति के अलावा और भी कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे कि जहाँ आप रहते हैं वहाँ की जलवायु कैसी है, पौधा लगाने का मौसम कैसा है, पौधों और उनके रख-रखाव के बारे में आप कितना सीख चुके हैं, और यह भी कि पौधे की देखभाल खासकर उसे पानी देने के लिए कितना समय निकाल पाते हैं।
सौ बात की एक बात: जितना प्राकृतिक उतना अच्छा
इस लिहाज से मिट्टी के गमले सबसे बेहतर हैं क्योंकि इन गमलों की सतह से पानी वाष्पीकृत होता रहता है जिससे गमले के भीतर की मिट्टी ठंडी बनी रहती है। तो गर्म जगहों पर या गर्मी के मौसम में पौधों को मिट्टी के गमले में लगाने से वह हरा-भरा बना रहता है। पौधा नाज़ुक है और ज्यादा गर्मी नहीं सह सकता या आपके पास बागवानी का ज़्यादा अनुभव नहीं है तो भी आप मिट्टी के गमले खरीदिए।
पकी मिट्टी के रंग में घर जैसा अपनापन और सुकून है। घोर शहर में भी गंवई-गाँव से जुड़े रहना हो तो मिट्टी के बर्तनों में पौधे लगाकर रखें।
इन गमलों के टूटने का खतरा ज्यादा रहता है खासकर बारिश के दिनों में। लगातार पानी में रहने और गीले बने रहने पर ये हल्का सा झटका लगने पर भी टूट सकते हैं। इसलिए इन्हें लेते समय ध्यान रखें कि ये अच्छी तरह से पके हों। इसके लिए इन पर चोट करके देखिए। ‘टन्’ की आवाज़ आए तो मतलब गमला ठीक से पका हुआ है।

सीमेंट/कंक्रीट के गमले
ये गमले सीमेंट और कंक्रीट में रेत मिलाकर बनाये जाते हैं। रेत मिलाने से इनमें छोटे-छोटे छिद्र बन जाते हैं जिनसे पानी रिस-रिस कर बाहर आता रहता है और मिट्टी का तापमान ठीक रहता है। ये मिट्टी के गमलों जैसे ही पौधे को ख़ुश रखते हैं और उनसे ज्यादा मजबूत भी होते हैं।
पर इनका वजन ज्यादा होता है इसलिए ऐसी जगहों पर इन्हें रखें जहाँ से बार-बार हटाना न पड़े।
सीमेंट और मिट्टी के गमले प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि इनमें से पानी वाष्पित होता रहता है इसलिए इनके अंदर की मिट्टी जल्दी सूखती है। इसलिए बाकी गमलों की तुलना में इनमें पानी जल्दी देना पड़ता है। ज्यादा पानी पसंद करने वाले पौधे इनमें तभी लगाएं जब मौसम के मुताबिक आप हर रोज़ या कम से कम 2 से 3 दिन में एक बार पानी देने के लिए समय निकाल सकें।
लकड़ी या बांस के गमले
तापमान बहुत ज्यादा न हो, पौधा बहुत नाज़ुक न हो या पानी पसंद करने वाला पौधा हो और बागवानी का थोडा-बहुत अनुभव भी हो तो लकड़ी या बांस के बने गमले प्रयोग में लाए जा सकते हैं। इनकी सतह से पानी का वाष्पन नहीं होता और इस वजह से इनके अंदर की मिट्टी उतनी ठंडी नहीं हो पाती। पर ये खुद जल्दी गरम या ठंडे भी नहीं होते।
प्लास्टिक या फाइबर से बने गमले
ये भी लकड़ी या बांस के गमलों की तरह ही होते हैं। ये गमले सबसे सस्ते, हल्के और टिकाऊ भी होते हैं इसलिए सबसे ज्यादा प्रचलन में भी हैं।
ग्लेज्ड सिरेमिक या पत्थर के गमले
ग्लेज्ड सिरेमिक या पत्थर का बना गमला पोरस (छिद्रयुक्त) नहीं होता और ठंडा गरम भी जल्दी होता है। इसलिए इनमें भरी हुई मिट्टी धूप से तो गर्म होती ही है पर साथ ही इनके गर्मी सोखने की वजह से और ज्यादा गरम हो जाती है। इस गर्म मिट्टी में पानी डालने पर वह और भी ज्यादा गर्म हो जाती है क्योंकि वह गुप्त ऊष्मा जो पानी के भाप बनने पर निकलती है वह इनमें से बाहर नहीं निकल पाती। इसलिए इनका प्रयोग तभी करें जब मौसम सामान्य हो, पौधा गर्मी बर्दाश्त कर सकता हो और आपको बागवानी का ठीक-ठाक अनुभव हो गया हो।
पर ये गमले बहुत आकर्षक भी होते हैं तो आपको ध्यान ये रखना है कि इनमें ऐसे पौधे ही लगाएं जिन्हें घर के अन्दर रख सकते हों और जो कम धूप या सिर्फ उजाले में जी सकते हों। अगर बाहर रखना ही हो तो इसमें कैक्टस या सक्यूलेंट जैसे पौधे ही लगाएं जो तेज़ गर्मी बर्दाश्त कर सकें। इनमें पानी भी बहुत ज़्यादा न डालें। टंकी में भरा हुआ गरम पानी तो बिल्कुल न डालें। या अगर धूप भी नहीं रोक सकते और नाज़ुक सुंदर पौधा ही इन सुंदर गमलों में लगाना है तो उसे किसी प्लास्टिक वगैरह के गमले में लगाकर गमले समेत इनके अंदर रख दें।
धातु के बने गमले
सबसे आखिर में आते हैं धातु के बने सजावटी गमले। इनमें एक ख़ास बात आप देखेंगे कि नीचे वाला छेद या ड्रेनेज होल इनमें नहीं होता। इसके अलावा ये पोरस (छिद्रयुक्त) भी नहीं होते और गरम ठंडे भी बहुत जल्दी हो जाते हैं। असल में ये पौधे लगाने के लिए नहीं घर सजाने के लिए ही बने हैं। इसलिए आपको कोई भी पौधा इनमें सीधे नहीं लगाना है। बल्कि बिल्कुल माथापछ्ची किये बिना कोई भी पौधा गमले समेत इनके अन्दर रख दीजिए। इस तरह पौधे को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचेगा और आप जब चाहें इनके अन्दर का पौधा बदलकर घर को नया ‘लुक’ भी दे सकेंगे।
तो दोस्तो आपने देखा कि आपके बगीचे की हरियाली में गमलों की भी बड़ी भूमिका है। दरअसल पौधे के लिए उसका गमला ही उसका घर है। सही गमले का चयन पौधे की ख़ुशी और पौधायन की हरियाली में इजाफा करता है।
अगली बार गमलों के बारे में और भी बातें जानेंगे। तब तक के लिए हैप्पी पौधायन!
नमस्कार!!